- आस्था एवं प्रकृति का समागम है सिहावा स्थित कल्पेश्वर आश्रम
नगरी। राजशेखर नायर : अपरंम्पार है सिहावा के महेन्द्रगिरी पर्वत स्थित बाबा कल्पेश्वरनाथ की महिमा। नगरी मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर महेंद्र गिरी पर्वत के नीचे गणेश घाट के किनारे स्थित है कल्पेश्वर आश्रम में स्थापित शिवलिंग की महिमा अपरंपार है। कहते हैं की शिवलिंग के दर्शन से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। सोमवार को विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया जाता है ।कहते हैं की नाग देवता भी आराध्य की दर्शनों के लिए आते हैं।आश्रम से कुछ दूरी पर पहाड़ी की चोटी पर भगवान परशुराम गुफा के भी दर्शन किए जा सकते हैं। आश्रम के पुजारी के अनुसार कपिल मुनि ने घोर तपस्या से शिव को प्रसन्न कर सिद्धि प्राप्त की । महर्षि कर्दम व देवहुति के आत्मज कपिल मुनि जो विष्णु के अवतार कहे जाते हैं। उन्ही के नाम पर इस आश्रम का नाम कल्पेश्वर आश्रम पढा। कपिलेश्वर बाबा को जगत के स्वामी, जगत किसान, त्रिभुवन दाता, संतान दाता, धान्य दाता, पशुपति, रोग शोक नाशक बैद्यनाथ, अधम उद्धारक माना जाता है।

सावन सोमवार को
बडी सख्या में कांवरिए यहां जलाभिषेक केलिये आते है। शिवलिंग के चारों ओर जहरीले सर्प को भी विचरण करते हुए देखा जा सकता है। आश्रम में पहाड़ी के चोटी पर परशुराम गुफा स्थित है। आश्रम के पुजारी के अनुसार भगवान श्री राम ने जब परशुराम धनुष तोड़ने के बाद, महर्षि परशुराम ने इसी गुफा में तपस्या की थी। गुफा में महर्षि परशुराम का चूड़ा और कंगन भी देखे जा सकता हैं।

आस्था एवं प्रकृति का समागम
यह आश्रम पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है । शासन को आश्रम के विकास पर ध्यान देना चाहिये। कल्पेश्वर आश्रम गणेश घाट के किनारे स्थापित है व कुछ ही दूरी पर श्रृंगी ऋषि का आश्रम व माता शांता देवी का आश्रम भी स्थित है।
