गरियाबंद : जिला प्रशासन द्वारा घोषित एक सप्ताह के लॉक डाऊन की घोषणा के बाद आज सब्जी बाजार व किराना मार्केट में लोगो की भारी भीड़ देखी गई , लोग अपने घरों में एक सप्ताह का पर्याप्त राशन व सब्जी के भंडारण की जद्दोजहद में लगे नजर आये। इधर व्यवसायियों ने आपदा में अवसर तलाश लिया और सब्जियों सहित किराना जिंसों के भाव आसमान छूने लगे। सब्जी मंडी से मिली जानकारी के अनुसार वैसे भी इस माह में सब्जियों की आवक बेहद कम होती है। लोकल बाड़ियों से फिलहाल बरबट्टी , तोरई व भिंडी ही आ रही है। ऐसे में टमाटर शिमलामिर्च फूलगोभी गाजर आदि के लिए रायपुर मंडी का ही सहारा है। इन सबके बीच आलू और प्याज की कीमत ने आम घरों के रसोई की रंगत बिगाड़ रखी है। स्थानीय थोक मार्किट में आलू प्याज के व्यापार में मोनोपल्ली की वजह से निम्न स्तर का माल ही यहाँ मिल पाता है। एक जानकारी के अनुसार गरियाबंद नगर में बंगाल से आलू प्याज की खेप पहुचती है , जिसकी क़्वालिटी बेहद घटिया किस्म की होती है। यही माल आस पास के ग्रामीण इलाकों में भी सप्लाई होता है। बरसों बरस से जारी इस खेल की वजह से अब यहाँ के लोग अच्छी किस्म के आलू प्याज की शक्ल ही भूल गये है। कुछ दिनों पूर्व तक बाजार में 10 रु किलो बिकने वाले आलू प्याज की कीमत आज 5 गुनी अधिक देखी गई। बरबट्टी टमाटर करेला जैसी सब्जियों के दाम 100 रु से 120 रु प्रति किलो रहे। इन सबके अलावा खाने के तेलों के भाव में भी बेहतहासा वृद्धि हुई है। थोक में रिफाइंड तेल का 15 केजी के टीन की कीमत इस समय 1600 रु प्रति टीन हो गई है। मूल्य वृद्धि का कारण पूछने पर व्यवसायी का जवाब होता है कि ऊपर से भावों में तेजी है , हम क्या करे। वैसे देखा जाये तो गरियाबंद जिले में घोषित लॉक डाऊन के दो दिन पहले ही 21सितंबर से एक सप्ताह के लिये रायपुर बंद का असर भी खाद्य वस्तुओं की मूल्य वृद्धि पर पड़ा है।
गुटखा गुड़ाखु की बल्ले बल्ले
23 सितंबर से 30 सितंबर तक एक सप्ताह के लॉक डाऊन के फरमान के साथ ही जानकारी मिल रही है कि गुटखा और गुड़ाखु की कीमत एक बार फिर दो से तीन गुना अधिक हो गई है। कई दिनों तक बाजार दुकानों के बंद रहने की दशा में इस प्रकार के नशे के शौकीन इसकी पर्याप्त मात्रा अपने पास रखना चाहते हैं। इसी वजह से प्रति दिन एक या दो पाउच की मांग करने वाला ग्राहक अब एक साथ 25 से 50 पाउच की डिमांड करने लगा है।