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भिलाई परियोजना के तीन दर्शन सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्रों में 26 बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन

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दुर्ग : जिले में राष्ट्रीय पोषण माह-2020  के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों और सेक्टर स्तर पर “ सही पोषण-छत्तीसगढ रोशन “ जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। कोविड-19 की वजह से कंटेन्टमेंट जोन को छोड़ कर अन्य क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालन भी किया जा रहा है। पोषण माह में 1 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रत्येक दिन अलग-अलग गतिविधियां महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन एवं परियोजना अधिकारी श्रीमती पूजा अग्रवाल के मार्गदर्शन में की जा रही  है।भिलाई परियोजना के तीन दर्शन सेक्टर के 26 आंगनबाड़ी केंद्रों के 6 माह के उम्र के 26 बच्चों का माह के चौथे मंगलवार को अन्नप्राशन करवाया गया। पर्यवेक्षक श्रीमती ऊषा झा ने बताया सही समय पर पूरक आहार की शुरुआत से कुपोषण से बचा जा सकता है। इस  दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मुनेश्वरी सिंह ने बच्चों के हाथ भी धुलवाए।  महिला पर्यवेक्षक श्रीमती झा ने बताया 6 माह पूरे करने वाले शिशुओं को मीठा खीर खिलाकर पहली बार पूरक  आहार की शुरुआत यानि अन्नप्राशन करवाया गया। अन्नप्राशन कराए गए बच्चों में तीनदर्शन के आंगनबाड़ी केंद्र में शिशु यश कुमार माता सीमा देवी, मशानघाट आंगनबाड़ी केन्द्र में शिशु साक्षी माता पूजा साहू, कोसानगर सतनामी मोहल्ला आंगनबाड़ी केन्द्र में शिशु युगान्त माता किरण शामिल थे।  वहीं अम्बेडकर नगर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अन्नपूर्णा दुबे द्वारा विभिन्न मौसमी पौष्टिक फल एवं सब्जियों के पोषक तत्वों को भोजन में शामिल कर पोषण अभियान को सफल बनाने पर जोर दिया गया। मौसमी फल सेव, केला, अनार, पपीता और सब्जी हरी पत्तेदार सब्जी, मुनगा, गोभी, भिंडी, करेला, बरबट्टी, गवारफल्ली, कद्दू सहित अन्य सब्जी थाली में होना जरुरी है।

6 माह के बाद दें शिशु को पूरक आहार

छह महीने की उम्र के बाद शिशु को भोजन से अतिरिक्त पोषक तत्वों की जरुरत होती है, विशेष तौर पर आयरन की। शिशु के शुरुआती छह महीनों में उसकी पाचन और रोग प्रतिरोधक प्रणाली धीरे-धीरे मजबूत हो रही होती है। 7 वें माह से शिशु ठोस आहार को अधिक कुशलता से पचाने में सक्षम होने लगता है। शिशु को विभिन्न प्रकार के ठोस खाद्य पदार्थों (जैसे, मसला हुआ, नर्म या पका हुआ और सादा आहार) का स्वाद चखाते रहें। शिशु की बढ़ती शारीरिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, मसली हुई सब्ज़ियाँ और फल लगातार दिए जा सकते हैं। बेहतर प्रभाव के लिए, इसे सीरियल के साथ मिलाकर शिशु को दिन में लगभग 3 बार दें ।

क्या खिलाएं: सादे अनाज और मसले हुए फलों व सब्जियों के अलावा अब शिशु को गाढ़े मसले और नर्म पके हुए खाद्य पदार्थ भी दें।

कितना खिलाएं : स्तनपान कराने और ठोस खाद्य पदार्थों के बीच संतुलन बनाए रखें ।

आहार संबंधी सलाह: एक समय में एक ही ठोस पदार्थ देने का प्रयास करें।

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